क्या इसी का नाम ज़िंदगी है ज़िंदगी में कई उतार -चढ़ाव देखे ,समझ न पाया की आखिर ज़िंदगी क्या है लगता है इसी का नाम ज़िंदगी है इसमें अपनों का साथ ,अपनों के लिया जीना अपनों के लिए कुछ करना ,बस उस मालिक का साथ होना अतिआवश्यक है मेरे मालिक बस कोई दुःख का अहसास न हो ,ज़िंदगी खुशियों भरी हो ,ज़िंदगी में कोई गम न आये ,प्रभु मेरे ऊपर रहम करना। ...राजीव सिपहिया 



































































































































