Saturday, 26 March 2016

कैसे करें डायबिटीज कंट्रोल

डायबिटीज जिसे  मधुमेह  भी  कहा जाता  है एक गंभीर बीमारी है जिसे धीमी मौत (साइलेंट किलर ) भी कहा जाता हैl
Diabetes Article In Hindi
Symbol for Diabetes – A blue circle
संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है विशेष रूप से भारत में l इस  बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है  तथा रक्त की कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग  नहीं कर पाती  l यदि यह ग्लूकोज  का बढ़ा हुआ लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंग प्रत्यंगों को नुकसान  पहुँचाना शुरू कर देता  है l
 डायबिटीज के कारण (Causes  of Diabetes )-
खान पान एवं लाइफ स्टाइल की गलत आदतें जैसे मधुर एवं भारी भोजन का अधिक सेवन करना,चाय, दूध  आदि में  चीनी का ज्यादा सेवन,कोल्ड ड्रिंक्स एवं अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स अधिक पीना,शारीरिक  परिश्रम ना करना,मोटापा,तनाव,धूम्रपान,तम्बाकू,आनुवंशिकता आदि डायबिटीज के प्रमुख कारण हैं  l
डायबिटीज के लक्षण (Diabetes Symptoms)-
बार बार  पेशाब लगना,प्यास  ज्यादा  लगना, भूख  ज्यादा  लगना,बिना काम करे भी थकान  होना,शरीर में कहीं  घाव होने पर जल्दी ठीक ना होना तथा  त्वचा का बार बार इन्फेक्शन होना l ये सब डायबिटीज के लक्षण  हैंl
यदि इनमे से कुछ  लक्षण यदि  लगातार दिखाई दें तो  खून में शुगर की जाँच अवश्य करवानी चाहिए यह जाँच  बहुत सामान्य और सस्ती होती है जो छोटी छोटी लैब्स में आसानी से हो जाती हैं इसके लिए शुगर का शक होने पर दिन में किसी भी समय (ब्लड शुगर- रैंडम) जाँच करवाई जा सकती है या बार -बार जरुरत पड़े तो जाँच करने की मशीन  घर  पर लायी जा सकती है जो ज्यादा महँगी नहीं होती l
डायबिटीज रोग के उपद्रव  (Complications of Diabetes) –
यदि मधुमेह  रोग का समय पर पता ना चले या पता चलने पर भी खान पान तथा जीवन शैली में लगातार लापरवाही  की जाये और समुचित चिकित्सा ना की जाये तो  खून में सामान्य से अधिक बढ़ा हुआ शुगर का लेवल शरीर के अनेक  अंगों जैसे गुर्दे (Kidney),ह्रदय (Heart),धमनियां (Arteries) आँखें (Eyes) त्वचा (Skin) तथा  नाड़ी  तंत्र (Nervous System) को नुकसान  पहुँचाना शुरू  कर   देता  है और जब तक रोगी संभलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती  है l
 डायबिटीज की चिकित्सा-
1. ख़ान पान  में  सुधार  करें-चीनी (sugar) एवं  अन्य मीठे पदार्थो का सेवन कम से कम करें या ना करें,चोकर युक्त  आटा,हरी सब्जियां ज्यादा खाएं, मीठे फलों को छोड़ कर अन्य फल  खाएं,एक बार में ज्यादा खाने की बजाय भोजन  को छोटे छोटे अंतराल  में लें,घी तेल से बनी एवं तली भुनी चीजें जैसे- समोसे, कचौड़ी ,पूड़ी ,परांठे आदि का सेवन कम  से कम करें,गेहूँ,जौ एवं चने को मिला कर बनाई हुई यानि मिस्सी रोटी शुगर की बीमारी  में बहुत फायदेमंद होती  है l
  1. शारीरिक रूप से सक्रिय रहे –

नित्य व्यायाम करना ,योग प्राणायाम का नियमित  अभ्यास करना ,सुबह शाम चहल कदमी (Morning Evening walk) करना मधुमेह रोग में शुगर कंट्रोल करने के लिए बहुत लाभदायक  है तथा मोटापा नियंत्रण  में  रहता है जो  की  डायबिटीज  का  महत्वपूर्ण  कारण  है l
3. तनाव (Tension,Anxiety Stress) से  बचें –
मधुमेह रोग में तनाव की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है तनाव से बचने की पूरी  कोशिश करें l स्ट्रेस  या  तनाव  के  कारणों को आपसी बात चीत से हल करें, योगा, प्राणायाम,ध्यान  तथा सुबह शाम घूमने से स्ट्रेस कंट्रोल करने में सहायता मिलती  है l
 4. घरेलु  उपाय ( Home Remedies for Diabetes)
आयुर्वेद की कुछ जड़ी बूटियां मधुमेह रोग में  बहुत उपयोगी हैं इनका सेवन डायबिटीज में बहुत लम्बे  समय से किया  जा रहा है आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में इनकी उपयोगिता सिद्ध कर चुका है l
  • दाना मेथी –
दाना मेथी मधुमेह  में  बहुत उपयोगी है इसके लिए एक या दो चम्मच दाना मेथी को एक गिलास पानी में रात में  भिगो देते है सुबह मेथी को चबा चबा कर खा लेते हैं तथा मेथी के पानी को पी लेते हैं या मेथी का चूर्ण या सब्जी  बनाकर भी सेवन कर सकते हैं  l
  • करेला –

करेला भी डायबिटीज के लिए अति महत्पूर्ण है इसके लिए करेले का जूस अकेले या आंवले के जूस में मिला कर 100-125 ML  की मात्रा में सुबह शाम भूखे पेट लें साथ ही करेले की सब्जी  बनाकर या चूर्ण के रूप  में  भी सेवन  कर सकते  हैं l
  • जामुन –
जामुन का फल खाने  में जितना स्वादिस्ट और रुचिकारक होता है उतना  ही शुगर की तकलीफ में लाभदायक  होता  है इसके लिए जामुन के सीजन में जामुन के फल खाए जा सकते हैं तथा सीजन ना होने पर जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह शाम भूखे  पेट पानी से ले सकते हैं l
  • विजयसार –
विजयसार को ना केवल आयुर्वेद बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में बहुत उपयोगी  मानता है इसके लिए विजयसार की लकड़ी से बने गिलास में रात में पानी भर कर रख दिया जाता है सुबह भूखे पेट इस पानी को पी लिया जाता है विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन  के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं l
  • मधुमेह नाशक पाउडर –
इसके लिए गिलोय,गुड़मार,कुटकी,बिल्व पत्र,जामुन  की गुठली, हरड़, चिरायता,आंवला, काली जीरी,तेज पत्र,बहेड़ा नीम पत्र एवं अन्य जड़ी बूटियों को एक निश्चित अनुपात में लेकर पाउडर बनाया जाता है जो  की डायबिटीज  में बहुत फायदेमंद साबित होता है l
 उपरोक्त उपाय जरुरत के अनुसार उपयोग करने चाहियें ,खून में शुगर का लेवल कम ना हो जाये इसलिए समय समय  पर शुगर चैक करते रहना चाहिए l
5. औषधियां-
यदि  खून  में  शुगर  की  मात्रा  ज्यादा  बढ़ी  हुई  नहीं  हो  तो उपरोक्त  उपायों से  आराम  अवश्य  मिलता  है किन्तु यदि खून में शुगर लेवल ज्यादा हो तो चिकित्सक की राय अवश्य लेनी चाहिए ,इसके  लिए एलोपैथी में  इन्सुलिन के इंजेक्शन तथा मुख से सेवन करने वाली गोलियों आदि  का प्रयोग किया जाता है तथा आयुर्वेद में  बसंत  कुसुमाकर  रस,शिलाजत्वादि वटी,चन्द्र प्रभा वटी , शुद्ध शिलाजीत तथा अन्य अनेक दवाओं  का प्रयोग किया जाता  है ये दवाइयाँ डायबिटीज में बहुत फायदेमंद होती हैं लेकिन इन्हे चिकित्सक की राय से ही सेवन करना चाहिए  l

तम्बाकू का नशा – कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार

तम्बाकू का नशा – कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार

तम्बाकू एक धीमा जहर है जो सेवन करने वाले व्यक्ति को धीरे धीरे करके मौत के मुँह मे धकेलता रहता है l लोग जाने अनजाने मे तम्बाकू उत्पादों का सेवन करते रहते है, धीरे धीरे शौक लत मेँ परिवर्तित हो जाता है और तब नशा आनंद प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि ना चाहते हुए भी किया जाता है एक शायर ने क्या खूब कहा है –
कौन कमबख्त पीता है मजा लेने के लिए,
हम तो पीते हैं क्योंकि पीनी पड़ती है !
तम्बाकू उत्पादों का सेवन अनेक रूप में किया जाता है, जैसे बीड़ी ,सिगरेट, गुटखा, जर्दा, खैनी, हुक्का ,चिलम आदि l सिगरेट, बीडी और हुक्के का हर कश एवं गुटखे, जर्दे, खैनी की हर चुटकी हर पल मौत की ओर ले जा रही होती हैl
Hindi Essay on World No Tobacco Day
कौन किसे जलाता है !
तम्बाकू उत्पादों के सेवन से नुकसान / Harmful effects of tobacco in Hindi
  • तम्बाकू में मादकता या उतेजना देने वाला मुख्य घटक निकोटीन (Nicotine) है यही तत्व सबसे ज्यादा घातक भी है  l
  • इसके अलावा तम्बाकू मे अन्य बहुत से कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पाये जाते है l
  • धुम्रपान एवँ तम्बाकू खाने से मुँह् ,गला, श्वासनली व फेफडोँ का कैंसर (Mouth, throat and lung cancer ) होता है l
  • दिल की बीमारियाँ (Heart Disease )
  • धमनी काठिन्यता,उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure )
  • पेट के अल्सर (Stomach Ulcer ),
  • अम्लपित (Acidity),
  • अनिद्रा (insomnia) आदि रोगों की सम्भावना तम्बाकू उत्पादों के सेवन से बढ़ जाती है l
तम्बाकू की लत के कारण / Cause of tobacco addiction in Hindi
कभी दूसरों की देखा देखी, कभी बुरी संगत मे पडकर कभी मित्रो के दबाब में, कई बार कम उम्र मेँ खुद को बडा दिखाने की चाहत में तो कभी धुएँ के छ्ल्ले उडाने की ललक,कभी फिल्मों मे अपने प्रिय अभिनेता को धूम्रपान करते हुए देखकर तो कभी पारिवारिक माहौल का असर तम्बाकू उत्पादों की लत का कारण बनता है l अधिकतर लोग किशोरावस्था या युवावस्था मेँ दोस्तोँ के साथ सिगरेट, गुट्खा, जर्दा, आदि का शौकिया रूप मेँ सेवन करते है शौक कब आदत एवँ आदत लत मे बदल जाती है पता ही नहीं चलता और जब तक पता चलता है तब तक शरीर को बहुत नुक्सान पहुँच चुका होता है l
धूम्रपान, जर्दा, खैनी आदि नशा छोडने के उपाय ( How to quit tobacco/ smoking  in Hindi 
1. नशा छोड्ने का मन से निश्चय करेँ l
2. यदि नशा एक बार मेँ झटके से छोड्ना मुश्किल लगे तो धीरे धीरे मात्रा कम करते हुए छोड़ें।
3. सभी मित्रोँ,परिचितों को बता दें कि आपने नशा छोड दिया है ताकि वे आपको नशा करने के लिये बाध्य ना करेँ l
4. डायरी लिखेँ कि आप कब और कितनी मात्रा मे नशा करते हैं क्या कारण है जो आपको नशा करने के लिये प्रेरित होते  हैं l
5. अपने पास सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू, एवँ माचिस आदि रखना छोड देँ l
6. खान पान एवं लाइफ स्टाइल में सुधार करें l
नशा छोड़ने के आयुर्वेदिक तरीके / Ayurvedic Ways to Quit Tobacco / Smoking
7. 50 ग्राम सौंफ एवँ इतनी ही मात्रा मेँ अजवायन लेकर तवे पर भूने, थोडा नींबू का रस एवँ हल्का काला नमक डाल लेँ l एक डब्बी में रखकर अपनी जेब में रख लें l जब भी सिगरेट एवँ तम्बाकू आदि की तलब लगे तो कुछ दाने मुँह मेँ रख लेँ एवं चबाते रहे इससे तलब कम होगी,अजीर्ण ( indigestion),अरुचि (Anorexia),गैस (Gas,Acidity) में आराम मिलेगा l
8. गुनगुने पानी मे नींबू का रस एवँ शहद डालकर पीना तलब को कम करता है तथा नशे के विषाक्त तत्वों को शरीर से बाहर निकालता है l
9. एक पुडिया मे सूखे आँवले के टुकडे, इलायची ,सौंफ, हरड के टुकडे रखेँ ताकि जब तलब लगे तो कुछ टुकडे मुँह में रखें और चबाते रहें इनसे तलब ( Craving) तो कम होती ही साथ ही खट्टी डकार ,भूख ना लगना (Lack of appetite ),पेट फूलने में आराम मिलता है l
नशा छोड़ते वक़्त क्या परेशानी आ सकती है ? / Withdrawal Symptoms in Hindi
सिगरेट ,बीडी,एवं अन्य तम्बाकू उत्पादोँ का नशा छोड्ने पर अनेक लक्षण उत्पन्न हो जाते है जो बहुत परेशान करते है इन्हे विड्रावल लक्षण ( Withdrawal Symptoms ) कहते है जैसे:
  • चिंता ( Stress,anxiety)
  • बेचैनी (Restlessness)
  • भूख ना लगना (Lack of appetite )
  • ह्रदय की धडकन बढना (Palpitation)
  • नींद ना आना (Lack of sleep)
  • ज्यादा पसीना आना (Excessive sweating)
  • नशे की तीव्र इच्छा होना ( Craving )
  • अवसाद ( Depression )
  • सिर दर्द आदि l
यदि लक्षण ज्यादा गम्भीर ना हों जो कि इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति नशा कितने समय से और कितनी मात्रा मे कर रहा है तो ऐसी स्तिथि मे आयुर्वेद की जड़ी बूटियां एवं औषधियां बहुत फायदेमंद होती हैं, जैसे-असगंध ,ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामांसी ,आंवला ,हरड, त्रिफला,मुलहठी ,सौंफ,इलायची,लवण भास्कर ,द्राक्षासव,अश्वगंधा अवलेह,अग्निटुंडी आदि बहुत उपयोगी हैं जिन्हे चिकित्सक की राय से सेवन किया जा सकता है l
31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस / World No Tobacco Day मनाया जाता है आइये इस अवसर पर हम संकल्प लें कि खुद भी नशा नही करेंगे और अन्य लोगो को भी नशा ना करने के लिये प्रोत्साहित करेंगे l
RAJEEV SIPAHIYA ..........PLS >SIPAHIYA.BLOGSPOT.COM

स्वस्थ शरीर है सबसे बड़ा खजाना !

स्वस्थ शरीर है सबसे बड़ा खजाना !

Do you really believe Health is Wealth ?

Health is Wealth

आधुनिक जीवन शैली की तेज रफ्तार एवं भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत का विषय बहुत पीछे रह गया है और नतीजा यह निकला की आज हम युवावस्था में ही ब्लड प्रेशर, डायबिटीजह्रदय रोग, कोलेस्ट्रोल, मोटापा, गठिया, थायरॉइड जैसे रोगों से पीड़ित होने लगे हैं जो कि पहले प्रोढ़ावस्था एवं व्रद्धावस्था में होते थे और इसकी सबसे बड़ी वजह है खान पान और रहन सहन की गलत आदतें, आओ हम सेहत के इन् नियमों का पालन करके खुद भी स्वस्थ रहे तथा परिवार को भी स्वस्थ रखते हुए अन्य लोगों को भी अच्छे स्वास्थय के लिए जागरूक करें ताकि एक स्वस्थ एवं मजबूत समाज और देश का निर्माण हो,क्योंकि कहा भी गया है-पहला सुख निरोगी काया l
भोजन हो संतुलित- घी,तैल से बनी चीजें जैसे पूड़ी,पराँठे,छोले भठूरे,समोसे कचौड़ी,जंक फ़ूड,चाय,कॉफी ,कोल्ड ड्रिंक का ज्यादा सेवन सेहत के लिए घातक है इनका अधिक मात्रा में नियमित सेवन ब्लड प्रेशर ,कोलेस्ट्रोल,मधुमेह,मोटापा एवं हार्ट डिजीज का कारण बनता है तथा पेट में गैस,अल्सर,ऐसीडिटी,बार बार दस्त लगना,लीवर ख़राब होना जैसी तकलीफें होने लगती हैं इनकी बजाय खाने में हरी सब्जियां,मौसमी फल,दूध,दही,छाछ,अंकुरित अनाज और सलाद को शामिल करना चाहिए जो की विटामिन,खनिज लवण,फाइबर,एव जीवनीय तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं l
चीनी एवं नमक का अधिक मात्रा में सेवन ना करें,ये डायबिटीज,ब्लड प्रेशर,ह्रदय रोगों का कारण हैं l
बादाम,किशमिश,अंजीर,अखरोट आदि मेवा सेहत के लिए बहुत लाभकारी होते हैं इनका सेवन अवश्य करें
पानी एवं अन्य लिक्विड जैसे फलों का ताजा जूस,दूध,दही,छाछ,नींबू पानी,नारियल पानी का खूब सेवन करें,इनसे शरीर में पानी की कमी नहीं हो पाती,शरीर की त्वचा एवं चेहरे पर चमक आती है,तथा शरीर की गंदगी पसीने और पेशाब के दवारा बाहर निकल जाती है l
व्यायाम का करें नियमित अभ्यास– सूर्योदय से पहले उठकर पार्क जाएं,हरी घास पर नंगे पैर घूमें,दौड़ लगाएं,वाक करें,योगा,प्राणायाम करें,इन उपायों से शरीर से पसीना निकलता है,माँस पेशियों को ताकत मिलती है,शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है,अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों से बचाव होता है,पूरे दिन भर बदन में चुस्ती फुर्ती रहती है,भूख अच्छी लगती है इसलिए नियमित रूप से व्यायाम अवश्य करें l
गहरी नींद भी है जरुरी -शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन लगभग 7 घंटे की गहरी नींद एक वयस्क के लिए जरुरी है,लगातार नींद पूरी ना होना तथा बार बार नींद खुलना,अनेक बीमारियों का कारण बनता हैl
अच्छी नींद के लिए ये उपाय करें- सोने का कमरा साफ सुथरा,शांत एवं एकांत में होना चाहिए,रात को अधिकतम 10-11 बजे तक सो जाना और सुबह 5-6 बजे तक उठ जाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है,सोने से पहले शवासन करने से अच्छी नींद आती है,खाना सोने से 2-3 घंटे पहले कर लेना चाहिए एवं शाम को खाना खाने के बाद 20-25 मिनट अवश्य घूमें l
टेंशन को कहें बाय बाय  रोज मर्रा की जिंदगी में आने वाली समस्यों के लिए चिंतन करना सही है चिंता करना नहीं,चिता तो फिर भी मरने के बाद शरीर को जलाती है किन्तु लगातार अनावश्यक चिंता जीते जी शरीर को जला देती है इसलिए तनाव होने पर भाई,बंधू एवं विश्वास पात्र मित्रों से सलाह मश्वरा करें यदि समस्या फिर भी ना सुलझे तो विशेषज्ञ से राय लें l
नशे से रहें बच के- यूवा पीढ़ी के लिए कोई सबसे खतरनाक बीमारी है तो वो है नशे के जाल में फँसना,शराब,धूम्रपान,तम्बाकू ये सब सेहत के दुश्मन हैं,किसी भी स्थिति में नशे की लत से बचें,यदि नशे से बचे हुए हैं तो बहुत अच्छा किन्तु,यदि कोई नशा करते हैं तो जितनी जल्दी नशे से दुरी बना लें उतना ही अच्छा है,ये ऐसी बीमारी है जो कैंसर और एड्स से भी ज्यादा खतरनाक है और एकसाथ कई परिवारों को बर्बाद करती है तथा शारीरिक,मानसिक,आर्थिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा के नाश का कारण बनती है,इसलिए नशे से बचना ही बेहतर उपाय है l
स्वास्थय के ऊपर बताये हुए नियमों का पालन अवश्य करें क्योकि कहा भी गया है- हैल्थ इज वैल्थ

नशा छोड़ें, घर जोड़ें

नशा छोड़ें, घर जोड़ें

नशा = नाश
नशा = नाश
नशा ऐसी बीमारी है जो हमें,हमारे समाज को ,हमारे देश को तेजी से निगलते जा रही है आज शहर और गावों में पढ़ने खेलने की उम्र में स्कूल और कॉलेज के बच्चे एवं युवा वर्ग मादक पदार्थों के बाहुपाश में जकड़ते जा रहे हैं l
इस बुराई के कुछ हद तक जिम्मेदार हम लोग भी हैं हम अपने काम धंधों में इतना उलझ गए हैं कि हमें फुर्सत ही नहीं है ये जानने की कि हमारा बच्चा कहाँ जा रहा है, क्या कर रहा है कोई परवाह नहीं,बस बच्चों की मांगे पूरी करना ही अपनी जिम्मेदारी समझ बैठे हैं l
क्यों करते हैं लोग नशा –
कभी शौक के नाम पर तो कभी दोस्ती की आड़ में,कभी दुनियाँ के दुखों का बहाना करके तो कभी कोई मज़बूरी बताकर ,कभी टेंशन तो कभी बोरियत दूर करनेके लिए लोग शराब ,सिगरेट,तम्बाकू आदि अनेक प्रकार के मादक द्रव्यों का सेवन करते हैं लेकिन नशा कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता, जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है l
नशे से नुकसान:
हिंसा,बलात्कार,चोरी,आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है l शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट करना, शादी शुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात हैl मुँह ,गले व फेफड़ों का कैंसर, ब्लड प्रैशर,अल्सर,यकृत रोग,अवसाद एवं अन्य अनेक रोगों का मुख्य कारण विभिन्न प्रकार का नशा है l
उपचार -नशा छोड़ने के लिए निम्न उपाय करें :
  • डायरी बनायें – नशा कब और कितनी मात्रा में लेते हैं लिखें l
  • विचार करें -आपके लिए आपका परिवार,बच्चे ,कैरियर और स्वास्थय कितनी अहमियत रखता है ,आपके नशा करने से इन चीजों पर कितना असर हो रहा है l
  • नशा छोड़ने से आपको क्या फायदे और क्या नुकसान होंगे एवं यदि आप नशा जारी रखते हैं तो आपके भविस्य पर क्या असर होगा ,गम्भीरता से विचार करें l 
  • पॉजिटिव रहें ,अपने आपको खेल कूद ,किताबें पड़ना,फ़िल्म देखना एवं गाने सुनना जैसी गतिविधियों में व्यस्त रखें ,अकेले ना रहें l
यदि इतने उपाय करने के बाद भी नशा छोड़ने में सफल न हों तो विशेषज्ञ एवं नशा मुक्ति केंद्र से राय लेना बेहतर होगा 
  RAJEEV SIPAHIYA 

सर्दियों में स्वस्थ रहने के घरेलू उपाय

सर्दियों में स्वस्थ रहने के घरेलू उपाय

सर्दी का मौसम सेहत के लिहाज से बेहतरीन मौसम माना जाता है । इस समय पाचन शक्ति अच्छी रहती है, भूख भी
Ayurvedik Winter Tips Hindi Sardiyanअच्छी लगती है,खाया  पीया अच्छे से हजम हो जाता है, रातें लम्बी होती हैं, जिससे आराम करने को भी पर्याप्त समय मिल जाता है, जिस प्रकार एक व्यापारी व्यापार के सीजन में खूब मेहनत करके पर्याप्त धन अर्जित कर लेता है और फिर वर्ष के शेष समय में कम आय  होने के बावजूद आराम से जीवनयापन कर पाता है, उसी प्रकार हमें शीत ऋतु में पौष्टिक  आहार एवं व्यायाम,योगा आदि के द्वारा पर्याप्त बल एवं शक्ति अर्जित कर लेनी चाहिए, ताकि वर्ष पर्यन्त स्वस्थ रह  सकें ।
सर्दियों में इन बातों पर ध्यान दें :-
पौष्टिक  पदार्थ लें-
इस समय पाचकाग्नि तीव्र होती है, भूखे रहना नुकसानदायक होता है, इस दौरान घी, मक्खन, उड़द की दाल, गाजर का हलवा, गोंद के लड्डू, तिल के लड्डू,च्यवनप्राश ,बादाम पाक , मूंगफली, गुड पपड़ी  जैसे बल एवं शक्ति वर्धक पदार्थों का सेवन सीमित  मात्रा  में करना बेहतर रहता है ।
मेवा (ड्राई फ्रूट्स) खायें-बादाम,काजू , पिस्ता, किशमिश, अखरोट, मूंगफली ये सब पोषक तत्वों से भरपूर हैं । विटामिन, खनिज लवण एवं एंटी ऑक्सीडेंट तत्वों का भंडार हैं, इनका सर्दी के मौसम में सेवन करना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है साथ ही  दूध, दही, छाछ का नियमित सेवन शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक होता है, शीत ऋतु में मक्का ,बाजरे की रोटी  घी, मक्खन, गुड के साथ सेवन करना स्वादिष्ट  एवं गुणकारी होता है ।
मौसमी फल एवं हरी सब्जियां खाँयें –
अनार,आंवला , सेब, संतरा, अमरुद जैसे फल एवं गाजर, मूली,पालक,शकरकंद,गोभी ,टमाटर, मटर जैसी सब्जियों  में विटामिन, खनिज लवण एवं फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे ये फल एवं सब्जियां सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं ।
शारीरिक रूप से सक्रिय रहें –
शीत ऋतु के दौरान  भारी पदार्थों का  सेवन ज्यादा  किया जाता है तथा रातें लम्बी होने के कारण  शरीर को आराम भी ज्यादा मिलता है, इस वजह से शरीर का वजन बढ़ने की पूरी सम्भावना रहती है, इसलिए व्यायाम, योगा आदि का नियमित रूप से अभ्यास करना चाहिए,सुबह उठ कर  पार्क आदि में घूमने जायें , तेज क़दमों से चलें  या दौड़ लगायें , इन उपायों से शरीर से पसीने  के रूप में हानिकारक तत्व बाहर  निकल जाते है,शरीर का रक्त संचार बढ़ता है, तन मन स्वस्थ रहता है तथा जरुरत से ज्यादा  वजन भी नही बढ़ पाता  एवं शरीर की अंदरुनी  शक्ति का विकास होता है ।
मालिश करें-
सुबह भ्रमण  से आने के बाद हो  सके तो  कुछ देर  सूर्य की धूप  में बैठ कर सरसों ,बादाम आदि के  तेल से मालिश करें सूरज की किरणों से  विटामिन डी मिलता है जो की हड्डियों  की मजबूती एवं ताकत  के लिए बहुत  जरुरी होता है l मालिश से स्वास्थ्य  सुधरता  है, त्वचा की कान्ति  निखरती  है शीत ऋतु   में वातावरण में रुक्षता होती  है जिससे त्वचा एवं होंट  आदि फटने लगते है, त्वचा  रूखी हो जाती है, मालिश करने से त्वचा  में चिकनापन आता है,मांसपेशियां  मजबूत होती हैं, शरीर में खून का दौरा सुचारू रूप से चलता है, शरीर सुन्दर एवं सुगठित हो जाता है| इसलिए नित्य मालिश अवश्य करें l
पानी पीने  में आलस्य ना  करें-
सर्दी में अधिकतर लोग पानी पीने  में आलस्य करते हैं या यूँ कहें की  प्यास ही कम लगती है,जिससे शरीर में पानी  की कमी हो जाती है, त्वचा फटने लगती है, कमजोरी आ सकती है, इसलिए दिन भर में 7- 8 गिलास पानी  अवश्य पीयें . सर्दी में चाहें तो पानी गुनगुना करके पी सकते हैं, मोटापा कम  करने के लिए सुबह सुबह भूखे  पेट एक गिलास गुनगुने जल में एक नींबू  का रस  एवं एक चम्मच शहद  डाल कर पीयें     |
विवाहित पुरुष कर सकते हैं बाजीकरण द्रव्यों का सेवन-
आयुर्वेद में विवाहित स्त्री पुरुषों हेतु अनेक बलवर्धक एवं यौन  शक्ति  वर्धक दर्व्यों  के बारे में बताया गया है| जो की नेचुरल तो हैं ही साथ ही यौन  जीवन को खुशहाल बनाने के लिए बहुत उपयोगी हैं, विशेष रूप से उम्र के प्रभाव  एवं अनेक बीमारियों के कारण होने वाली कमजोरी  में बहुत फायदेमंद हैं,आयुर्वेद की  जड़ी बूटियां  जैसे असगंध,मूसली , गोखरू, मुलहटी, शिलाजीत, विदारीकन्द,बला ,अकरकरा  आदि से बने हुए औषध  योग जैसे च्यवनप्राश,मूसली पाक ,बादाम पाक ,कौंच पाक आदि  वैवाहिक  जीवन से सम्बंधित समस्याओं में बहुत उपयोगी हैं|
शीत ऋतु में बीमारियों  से करें बचाव-
सर्दी में ठंडी चीजें जैसे आइस क्रीम, ठन्डे पेय एवं बासी भोजन का सेवन ना करें, ज्यादा ठण्ड होने पर अच्छी तरह गरम कपड़े पहन ओढ़ कर ही बाहर  निकलें, विशेष रूप से बच्चे, बूढ़े लोग एवं औरतें   खास ध्यान रखें, तापमान के घटने से इस समय रक्त गाढ़ा हो जाता है, इसलिए डायबिटीज,उच्च  रक्त चाप एवं हृदय रोगियों को अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए|
सर्दी, जुकाम, खांसी होने पर निम्न घरेलु उपाय कर सकते हैं –
  • एक गिलास गरम दूध में आधी चम्मच सोंठ पाउडर एवं चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर डाल कर पीने से  गले के दर्द, खांसी, जुकाम सर्दी में तुरंत आराम आ जाता  है|
  • सर्दी, जुकाम एवं नाक बंद होने पर नमक के पानी से गरारे करना तथा गरम पानी में विक्स जैसी दवा  या कर्पूर  धारा डाल कर भाप लेना बहुत फायदेमंद है|
  • बार बार जुकाम होना, छींकें आना, नाक बंद होना यदि लगातार होता रहे तो साइनोसाइटिस ,दमा ,टॉन्सी लायटिस  की सम्भावना बढ़ जाती  है  एवं इन्फेक्शन कान के परदे तक पहुँच जाता है, जिससे जब  तक अंग्रेजी दवाइयाँ खाते हैं आराम रहता है, दवाइयाँ बंद करते ही प्रॉब्लम दुबारा शुरू हो जाती है या डॉक्टर  ऑपरेशन के लिए बोल देते हैं,कई बार  ऑपरेशन के बाद भी प्रॉब्लम दुबारा शुरू हो जाती है, ऐसी अवस्था  में आयुर्वेद की दवायें लक्ष्मी विलास रस, बसंत मालती रस, सितोपलादि चूर्ण , कंटकारी अवलेह, गोजिव्ह्यादि  , गोदन्ती, षड्बिन्दु  आदि दवायें बहुत फायदेमंद होती हैं, इनका सेवन आयुर्वेद डॉक्टर की सलाह से ही करें|
  • BY TIPS :RAJEEV SIPAHIYA   > SIPAHIYA.BLOGSPOT.COM<HAMIRPUR UHAL