Wednesday, 23 March 2016

अर्थराइटिस में क्‍या खायें

अर्थराइटिस यानी गठिया जोड़ों की बीमारी है। अर्थराइटिस की शिकायत होने पर चलने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है। लेकिन कुछ खाद्य प‍दार्थ ऐसे है जिनसे अर्थराइटिस का दर्द कम और कुछ से दर्द बढ़ सकता है। आइए ऐसे ही कुछ खाद्य प‍दार्थों के बारे में जानें।
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    अर्थराइटिस में क्‍या खायें

    अर्थराइटिस यानी गठिया जोड़ों की बीमारी है। अर्थराइटिस की शिकायत होने पर चलने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है। हालांकि यह बीमारी उम्रदराज लोगों को होती है, लेकिन बदली हुई लाइफस्‍टाइल के कारण इसकी चपेट में वर्तमान में युवा भी आ रहे हैं। अर्थराइटिस का दर्द इतना तीव्र होता है कि व्यक्ति को चलने–फिरने और यहां तक कि घुटनों को मोड़ने में भी बहुत परेशानी होती है। लेकिन आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल कर आप इस समस्‍या से बच सकते हैं।
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    लहसुन का सेवन

    लहसुन रक्त शुद्ध करने में सहायक है। अर्थराइटिस के कारण रक्त में यूरिक एसिड बहुत अधिक मात्रा में बढ़ जाता है। लहसुन के रस के प्रभाव से यूरिक एसिड गलकर तरल रूप में मूत्रमार्ग से बाहर निकल जाता है।
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    अजमोद

    अजमोद गठिया से ग्रस्त मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होता है। गाउट के हमले में ददै को कम करने के लिए अजमोद का रस प्रभावी तरीका हो सकता है। अजमोद एक मूत्रवर्धक है, जो किडनी की सफाई के लिए जाना जाता है। किडनी में मौजूद व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकाल कर यह आपको स्वस्थ रखता है।
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    अदरक

    अदरक रक्त प्रवाह और परिसंचरण में सुधार करता है। ठंड के मौसम के दौरान खराब जोड़ों के दर्द का अनुभव करने वाले अधिक संवेदनशील लोगों के लिए विशेष रूप से अच्छा होता है। जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को हर रोज दो सौ ग्राम अदरक दो बार लेने से दर्द में बहुत राहत मिलती है। आप चाहें तो सब्जी, सूप या अन्य चीजों में मिलाकर भी अदरक का सेवन कर सकते हैं।
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    कैमोमाइल टी

    अर्थराइटिस के लिए कैमोमाइल टी सबसे ज्‍यादा फायदेमंद मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटी इंफेल्‍मेटेरी तत्‍व अर्थराइटिस के इलाज में फायदेमंद है। इसे आप चाय की तरह या खाने के तौर पर ले सकते हैं। यह जोड़ो में यूरिक एसिड बनने से रोकता है।
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    सेब साइडर सिरका

    सेब साइडर सिरका आपके पाचन में सुधार करता है, विशेष रूप से प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को बेहतर तरीके से पचाता है। उम्र बढ़ने पर हमारे पेट की क्षमता कम और जोड़ों का दर्द बढ़ जाती है। ऐसे में सेब साइडर सिरका बहुत मददगार होता है। सेब साइडर सिरका आपके शरीर को अधिक क्षारीय बनाने में मददकर जोड़ों के दर्द को कम करता है।
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    अर्थराइटिस में इन आहार से बचें

    अर्थराइटिस होने पर शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक हो जाती है, इसके कारण ही जोड़ों में सूजन होती है। इसकी पीड़ा असहनीय होती है, खासकर ठंड के मौसम में इसका दर्द बर्दाश्‍त से बाहर हो जाता है। कुछ आहार तो ऐसे है जिनको खाने से अर्थराइटिस का दर्द और भी बढ़ सकता है। आइए जानें, किन आहार से बढ़ सकता है अर्थराइटिस का दर्द।
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    डेयरी प्रोडक्‍ट

    अर्थरा‍इटिस में दुग्‍ध उत्‍पादों को खाने से बचना चाहिए। दुग्‍ध उत्‍पादों से बने खाद्य-पदार्थ भी अर्थराइटिस के दर्द को बढ़ा सकते हैं। क्‍योंकि दुग्‍ध उत्‍पाद जैसे, पनीर, बटर आदि में कुछ ऐसे प्रोटीन होते हैं जो जोड़ों के आसपास मौजूद ऊतकों को प्रभावित करते हैं, इसकी वजह से जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है।
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    टमाटर न खायें

    टमाटर हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है, क्‍योंकि इसमें विटामिन और मिनरल भरपूर मात्रा में मौजूद होता है, लेकिन यह अर्थराइटिस के दर्द को बढ़ाता भी है। टमाटर में कुछ ऐसे रासायनिक घटक पाये जाते हैं जो गठिया के दर्द को बढ़ाकर जोड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं। इसलिए टमाटर खाने से परहेज करें।
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    खट्टे फल

    वैसे तो खट्टे फल अत्‍यंत स्‍वस्‍थ होते है, और विटामिन सी और अन्‍य पोषक तत्‍वों को प्राप्‍त करने का एक शानदार तरीका है। लेकिन कुछ लोगों में या जोड़ों के दर्द में वृद्धि कर सकते हैं। अगर आप स्‍वस्‍थ आहार का अनुसरण करके भी जोड़ों में दर्द से पीड़‍ित है तो एक महीने के लिए अपने आहार से खट्टे फलों को हटा कर देखें कि क्‍या होता है।
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    मछली न खायें

    अर्थराइटिस होने पर ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्‍त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए। मछली का सेवन करने से अर्थराइटिस का दर्द बढ़ सकता है। मछली में अधिक मात्रा में प्यूरिन पाया जाता है। प्यूरिन हमारे शरीर में ज्यादा यूरिक एसिड पैदा करता है। इसलिए सालमन, टूना और एन्कोवी जैसी मछलियों को खाने से बचना चाहिए।
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    शुगरयुक्‍त आहार

    चीनी शरीर के हर हिस्से में सूजन का कारण बनती है, इससे आपकी धमनियों में सूजन बढ़ जाती है। यह अथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों की दीवारों के अंदर जमा फैट) के अधिक खतरे का कारण बनता है, और प्रतिरक्षा कोशिकाओं के इंफ्लेमेटरी केमिकल के स्राव को उत्तेजित करता है। इसलिए अर्थराइटिस के मरीज को चीनी और मीठा खाने से परहेज करना चाहिए।
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    एल्‍कोहल और सॉफ्ट ड्रिंक

    एल्कोहल खासकर बीयर शरीर में यूरिक एसिड के स्‍तर को बढ़ाता है, और शरीर से गैर जरूरी तत्व निकालने में शरीर को रोकता भी है। इसी तरह सॉफ्ट ड्रिंक खासकर मीठे पेय या सोडा में फ्रक्टोज नामक तत्व पाया जाता है, जो यूरिक एसिड के बढ़ने में मदद करता है। 2010 में किए गए एक शोध के अनुसार, जो लोग ज्यादा मात्रा में फ्रक्टोस वाली चीजों का सेवन करते हैं, उनमें अर्थराइटिस होने का खतरा दोगुना अधिक होता है।

कैंसर के लक्षण

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में भारत सहित विश्‍व के सभी देशों के पुरुषों में प्रोस्‍टेट कैंसर के मरीजों की संख्‍या बढ़ रही है, आप भी इसके लक्षणों को जानें।
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    प्रोस्‍टेट कैंसर के लक्षण

    प्रोस्‍टेट कैंसर केवल पुरुषों को होता है, क्‍योंकि प्रोस्‍टेट ग्रंथि पुरुषों में होती है। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्‍टेट कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में प्रोस्‍टेट कैंसर के मामले भारत सहित पूरे देश में बढ़ रहे हैं। कैंसर का यह प्रकार 60 से अधिक उम्र वाले पुरुषों के प्रोस्टेट ग्रंथि में होने की संभावना अधिक होती है। प्रोस्टेट ग्रंथि अखरोट के आकार की एक ऐसी होती है जो युरेथरा (पेशाब की नली) के चारों ओर होती है। इसका काम काम वीर्य में मौजूद एक द्रव पदार्थ का निर्माण करना है। अगर इसके लक्षण शुरूआती दौर में पता चल जाये तो इसे गंभीर होने से बचाया जा सकता है।
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    पेशाब करने में समस्‍या

    पेशाब करने में समस्‍या ही प्रोस्‍टेट कैंसर के प्रमुख लक्षण है। प्रोस्‍टेट ग्रंथि बढ़ने के कारण पेशाब करने में परेशानी होती है। रात में बार-बार पेशाब जाना, अचानक से पेशाब निकल आना, पेशाब रोकने में समस्‍या, आदि लक्षण प्रोस्‍टेट कैंसर में दिखाई पड़ते हैं। अगर पेशाब करने में समस्‍या कई दिनों तक बनी रहे तो इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें, यह कैंसर हो सकता है।
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    टेस्टिकल्‍स में बदलाव

    हालांकि टेस्टिकल्‍स में बदलाव टेस्टिकुलर कैंसर का संकेत हो सकता है। लेकिन प्रोस्‍टेट ग्रंथि में ही टेस्टिक्‍स होते हैं जो प्रोस्‍टेट कैंसर के कारण बदल सकते हैं। अगर आपके टेस्टिकल्‍स का आकार बढ़ रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें। इसके आलाव टेस्टिकल्‍स में किसी भी तरह का बदलाव प्रोस्‍टेट कैंसर से संबंधित हो सकता है। अपने टेस्टिकल्‍स की नियमित रूप से जांच कीजिए, टेस्टिकल्‍स की जांच आप स्‍वयं कर सकते हैं। अगर आपको किसी भी प्रकार का बदलाव दिखे तो इसकी जांच करायें।
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    खून निकला

    प्रोस्‍टेट कैंसर के कारण पेशाब के साथ खून भी आयेगा, इसके अलावा मल के साथ भी खून निकल सकता है। प्रोस्‍टेट कैंसर के अलावा कोलेन, किडनी, ब्‍लैडर कैंसर में भी खून निकलता है। लगातार खून का निकलना भी कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर कैंसर है तो इसके कारण खून मलाशय के द्वारा बाहर निकलता है। हालांकि यह समस्‍या 50 की उम्र के बाद होती है, लेकिन वर्तमान लाइफस्‍टाइल के कारण यह किसी भी उम्र में हो सकती है।
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    त्‍वचा में बदलाव

    अगर शरीर के किसी भी हिस्‍से की त्‍वचा में किसी भी प्रकार का बदलाव हो तो चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए। त्‍वचा में असामान्य रूप से परिवर्तन होना कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति की त्वचा बेवजह सांवली या काली पड़ने लगी हो तो इसे नजअंदाज न करें। त्वचा का पीला पड़ना भी प्रोस्‍टेट कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
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    दर्द होना

    अगर आप बहुत काम करते हैं और देर तक कुर्सी पर बैठते हैं तो कमर, पीठ आदि जगह दर्द होना सामान्‍य है। लेकिन बिना किसी समस्‍या के शरीर के किसी भी हिस्‍से में लगातार दर्द होना कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर लगातार पीठ में दर्द हो रहा हो तो यह कोलोरेक्‍टल या प्रोस्‍टेट कैंसर का कारण हो सकता है। इसके अलावा कमर के आसपास की मांसपेशियों में भी दर्द होता है। इससे नजरअंदाज न करें।
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    वजन कम होना

    अगर बिना किसी कारण के आपका वजन कम हो रहा है तो कैंसर का शुरूआती लक्षण हो सकता है। वजन कम करने वाले किसी प्रयास के बिना ही शरीर का वजन 10 पौंड से ज्यादा कम हो जाये तो इसे कैंसर के प्राथमिक लक्षण के रूप में देखा जा सकता है। कैंसर होने के बाद खाना अच्‍छे से नहीं पचता और पाचन क्रिया भी सही तरीके से काम नहीं करती है, जिसके कारण शरीर का वजन कम होने लगता है।
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    थकान और बुखार

    प्रोस्‍टेट कैंसर होने पर व्‍यक्ति के शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसके कारण शरीर बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। सामान्‍य से फ्लू का भी बचाव शरीर नहीं कर पाता है। लगातार खांसी आना, बुखार होना, थकान की समस्‍या बने रहना, आदि प्रोस्‍टेट कैंसर के शुरूआती लक्षण हैं। इसके अलावा व्‍यक्ति के मुंह में भी बदलाव होता है।
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सफेद बालों की समस्या

कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जो सफेद होते बालों की समस्‍या को दूर कर सकते हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ हमारे घरेलू नुस्‍खों की पोटली से निकले कुछ बेहद असरदार उपाय।
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    सफेद बालों की समस्या

    बालों का असमय सफेद होना एक बड़ी समस्‍या बन चुकी है। इसके लिए कई लोग कलर का इस्‍तेमाल करते हैं। हालांकि कलर बालों को जड़ से कमजोर बना सकता है। कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जो सफेद होते बालों की समस्‍या को दूर कर सकते हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ हमारे घरेलू नुस्‍खों की पोटली से निकले कुछ बेहद असरदार उपाय।
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    आंवले का कमाल

    छोटा सा दिखने वाला आंवला न केवल आपकी सेहत के लिए गुणकारी है बल्कि इससे नियमित उपयोग से सफेद होते बालों की समस्‍या से भी निजात मिलती हैं। आंवले को न सिर्फ डाइट में शामिल करें बल्कि मेंहदी में मिलाकर इसके घोल से बालों की कंडिशनिंग करते रहें। चाहे तो आंवले को बारीक काट लें और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं।
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    बड़े काम की छोटी सी मिर्च

    काली मिर्च खाने का स्‍वाद तो बढ़ाती है, साथ ही इससे सफेद होते बाल भी काले होने लगते हैं। इसके लिए काली मिर्च के दानों को पानी में उबाल कर उस पानी को बाल धोने के बाद सिर में डालें। लंबे समय तक बालों में इस तरह करने से यह असर दिखाती है।
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    कॉफी और काली चाय, बालों को काला बनाये

    अगर आप सफेद होते बालों से परेशान हैं तो ब्‍लैक टी और कॉफी का इस्‍तेमाल करें। सफेद हो चुके बालों को अगर आप ब्‍लैक टी या कॉफी के अर्क से धोएंगें तो आपके सफेद होते बाल दोबारा से काले होने लगेगें। ऐसा आप दो दिन में एक बार जरूर करें।
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    एलोवेरा में है गजब का जादू

    बालों में एलोवेरा जेल लगाने से भी बालों का झडऩा और सफेद होना बंद हो जाता है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल में नींबू का रस बना कर पेस्‍ट बना लें और इस पेस्‍ट को बालों में लगाएं।
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    दही से करें सफेदी पर वार

    सफेद होते बालों का रंग प्राकृतिक रूप से बदलने के लिए दही का इस्‍तेमाल करें। इसके लिए हिना और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्‍ट बना लें और इस पेस्‍ट को बालों में लगाइये। इस घरेलू उपचार को हफ्ते में एक बार लगाने से ही बाल काले होने लगते हैं।
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    प्‍याज करे बड़े-बड़े काज

    प्याज आपके सफेद बालों को काला करने में मदद करता है। कुछ दिनों तक रोजाना नहाने से कुछ देर पहले अपने बालों में प्याज का पेस्ट लगायें। इससे आपके सफेद बाल काले होने शुरू हो ही जाएंगे, बालों में चमक आएगी और साथ ही बालों का गिरना भी रुक जाएगा।
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    भृंगराज और अश्वगंधा काम करें बड़ा चंगा

    भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्‍ट बना कर नारियल तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में एक घंटे के लिए लगाएं। फिर बालों को गुनगुने पानी से अच्‍छी तरह से धो लें। इससे बालों की कंडीशनिंग भी होगी और बाल काले भी होंगे।
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    दूध के अद्भुत लाभ

    गाय के दूध के फायदों के बारे में कौन नहीं जानता, लेकिन क्‍या आपको यह भी पता है कि गाय का दूध सफेद बालों को भी काला बना सकता है। गाय का दूध बालों में लगाने से बाल कुदरती तौर पर काले होने लगते हैं। ऐसा हफ्ते में एक दिन करें और देखिये कैसे खिल जाते हैं आपके बाल।
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    कढ़ी पत्ता करे बड़े कमाल

    सफेद हो रहे बालों के लिये कढ़ी पत्ता बहुत ही अच्‍छा होता है। नहाने से पहले कढ़ी पत्ते को नहाने के पानी में छोड़ दें और एक घंटे के बाद उस पानी से सिर धो लें। या फिर आंवले की तरह कढ़ी पत्ते को भी बारीक काटकर और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं। इससे भी लाभ होगा।
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    देसी घी से म‍ालिश्‍ा

    बुजुर्गो को अकसर आपने सिर पर देसी घी से मालिश करते हुए देखा होगा। घी से म‍ालिश करने से त्‍वचा को पोषण मिलता है। प्रतिदिन शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी बालों के सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

HEALTH TIPS

बवासीर या हैमरॉइड से अधिकतर लोग पीड़ित रहते हैं। इस बीमारी के होने का प्रमुख कारण अनियमित दिनचर्या और खान-पान है। बवासीर में होने वाला दर्द असहनीय होता है। बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है। बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी बवासीर में नसों की सूजन दिखती नहीं पर महसूस होती है, जबकि बाहरी बवासीर में यह सूजन गुदा के बिलकुल बाहर दिखती है।
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बवासीर को पहचानना बहुत ही आसान है। मलत्याग के समय मलाशय में अत्यधिक पीड़ा और इसके बाद रक्तस्राव, खुजली इसका लक्षण है। इसके कारण गुदे में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है।

नींबू

डेढ़-दो कागजी नींबू अनिमा के साधन से गुदा में लें। 10-15 मिनट के अंतराल के बाद थोड़ी देर में इसे लेते रहिए उसके बाद शौच जायें। यह प्रयोग 4-5 दिन में एक बार करें। इसे 3 बार प्रयोग करने से बवासीर में लाभ होता है।

जीरा

करीब दो लीटर मट्ठा लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और थोडा नमक मिला दें। जब भी प्यास लगे तब पानी की जगह यह छाछ पियें। चार दिन तक यह प्रयोग करने से बवासीर के मस्‍से ठीक हो जाते है। या आधा चम्‍मच जीरा पावडर को एक गिलास पानी में डाल कर पियें।

जामुन

जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

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इसबगोल

इसबगोल भूसी का प्रयोग करने से से अनियमित और कड़े मल से राहत मिलती है। इससे कुछ हद तक पेट भी साफ रहता है और मस्‍सा ज्‍यादा दर्द भी नही करता।

बड़ी इलायची

बड़ी इलायची भी बवासीर को दूर करने का बहुत ही अच्‍छा उपचार है। इसे सेवन करने के लिए लगभग 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रखकर भूनते हुए जला लीजिए। ठंडी होने के बाद इस इलायची को पीस लीजिए। रोज सुबह इस चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर ठीक हो जाता है।

किशमिश

रात को 100 ग्राम किशमिश पानी में भिगों दें और इसे सुबह के समय में इसे उसी पानी में इसे मसल दें। इस पानी को रोजाना सेवन करने से कुछ ही दिनों में बवासीर रोग ठीक हो जाता है।

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अन्‍य उपाय

चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है। हरड या बाल हरड का प्रतिदिन सेवन करने से आराम मिलता है। अर्श (बवासीर) पर अरंडी का तेल लगाने से फायदा होता है। साथ ही नीम का तेल मस्सों पर लगाइए और इस तेल की 4-5 बूंद रोज पीने से बवासीर में लाभ होता है। आराम पहुंचानेवाली क्रीम, मरहम, वगैरह का प्रयोग आपको पीड़ा और खुजली से आराम दिला सकते हैं।
  
इन औषधियों के प्रयोग के अलावा अपनी आंतों की गतिविधियों को सामान्‍य रखने के लिये, फल, सब्ज़ियां, ब्राउन राईस, ब्राउन ब्रेड जैसे रेशेयुक्त आहार का सेवन कीजिए। ज्‍यादा मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन कीजिए
Diabetes in Hindi, Madhumeha in Hindi, मधुमेह: ब्‍लड में शुगर का स्‍तर बढ़ने से डायबिटीज हो जाता है। मधुमेह (madhumeha) के मरीज को थकान और प्‍यास लगने के अलाव कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। तनाव भरा मा‍हौल डायबिटीज रोगी को और अधिक बीमार कर सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा वातावरण होना बहुत जरूरी है। डायबिटीज क्‍या है (मधुमेह, madhumeha kya hai), डायबिटीज होने के कारण (मधुमेह, madhumeha ke karan), डायबिटीज के विभिन्‍न प्रकार, टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज, जेस्टेशनल डायबिटीज, टाइप वन डायबिटीज के जोखिम कारक, टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम कारक, डायबिटीज का निदान, डायबिटीज के लक्षण (मधुमेह, madhumeha ke lakshan), मधुमेह की जांच, मधुमेह में घर पर कैसे पता करें ग्‍लूकोज का स्‍तर, डायबिटीज के मरीजों के लिए आहार, डायबिटीज के मरीज कैसे जिएं सामान्‍य जीवन, डायबिटीज से संबंधित तथ्‍य, मधुमेह या डायबिटीज में पानी पीने के फायदे, 
                        .......राजीव सिपहिया 
मधुमेह को एक साइलेंट किलर के नाम से जाना जाता है। अगर समय रहते मधुमेह रोग पर नियंत्रण नहीं किया गया तो ये शरीर के अन्य अंगो पर भी बुरा असर डालने लगता है।इसके बारे में जानकारी विश्व मधुमेह दिवस पर डॉ. राजीव कपूर ने दी। मधुमेह का सबसे ज्यादा असर  हृदय, किडनी एवं आंख पर पड़ता है। शराब एवं धूम्रपान न किया जाए और नियमित रूप से व्यायाम के साथ 30 से 45 मिनट की सैर मधुमेह में बहुत लाभदायक है।

शोध के अनुसार


मधुमेह के मरीजों की बढ़ती हुई संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. कपूर कहा कि मधुमेह लक्षण के न होने पर भी आपको मधुमेह हो सकता है। मधुमेह के लिए अपने रक्त की जांच चिकित्सालय में समय-समय पर अवश्य कराते रहें, जिससे बीमारी का जल्द से जल्द पता चल जाए और इलाज भी जल्द से जल्द शुरू हो जाए।

उन्होंने कहा कि खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाए। तनाव को कम करने के लिए योग एवं मेडिटेशन लाभप्रद है। कभी-कभी रक्त में ग्लूकोज की कमी हो जाने के कारण एक गंभीर समस्या पैदा होती है, जिसे हाइपोग्लाइसेमिया कहते हैं। यदि इसका अतिशीघ्र उपचार नहीं किया गया तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

डॉ. राजीव कपूर ने कहा कि मरीज होश में हो तो उसे शर्करायुक्त चीजें, जैसे शरबत, ग्लूकोज का घोल वगैरह दिया जाना चाहिए। इससे मरीज तुरंत बेहतर महसूस करने लगता है।