जब उसे लगा कि उसने अपना सारा ज्ञान बटोर लिया है तो मिटटी के एक घड़े में उसने अपना सारा ज्ञान जो है वो बंद कर दिया |इसके बाद उसने योजना बनायीं कि इस मिटटी के घड़े को वह किसी ऐसी जगह बंद कर देगा जन्हा से फिर कोई भी मनुष्य उसको प्राप्त नहीं कर पायेगा | इस तरह वो मिटटी के घड़े को लेकर जंगले की और चल पड़ा | उस व्यक्ति के बेटे को काफी दिन से संदेह था कि उसका पिता किसी संदिग्ध गतिविधि से जुड़ा है क्योंकि वो काफी दिन से अपने पिता को बैचेन देख रहा था | तो उसने अपने पिता का पीछा करना शुरू कर दिया |जंगल में पहुँच कर उस व्यक्ति ने सोचा क्यों न मैं इस घड़े को किसी वृक्ष पर सुरक्षित छिपा दू ये सोचकर उसने मटके को एक हाथ में लेकर पेड़ पर चढ़ने की कोशिश की लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाया | पिता की मज़बूरी जानकर उसके छिपे हुए बेटे से रहा नहीं गया और वो बोल उठा कि “पिताजी ऐसा क्यों नहीं करते कि इस घड़े को आप अपनी पीठ पर लेकर पेड़ पड़ चढ़ जाएँ |”
जब पिता ने पीछे मुडके देखा तो उसे बहुत गुस्सा आया और उसने सोचा कि मेने सोचा था मेने सारा ज्ञान घड़े में बंद कर दिया है लेकिन ये तो मुझसे भी अधिक ज्ञानी है सो गुस्से में आकर उसने वो मिटटी का घडा जमीन पर दे मारा और घडा फूट गया और इसी से सारा ज्ञान दुनिया में फ़ैल गया और सारे मनुष्य ज्ञानी हो गये |
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